उत्तर प्रदेशबहराइच

सालार मसूद दरगाह पर करोड़ों के चढ़ावे में वित्तीय घोटाले का आरोप, DM ने वक्फ बोर्ड को भेजी रिपोर्ट

बहराइच की सैयद सालार मसूद दरगाह में वित्तीय अनियमितताओं और नियुक्तियों पर सवाल उठे हैं। डीएम की जांच रिपोर्ट वक्फ बोर्ड को भेजी गई, जबकि प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताया।

Reported by AJAY SHARMA and edited by Shagun Chaurasia

Bahraich Dargah: उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित सैयद सालार मसूद गाजी दरगाह एक बार फिर विवादों में है। दरगाह प्रबंधन पर वित्तीय अनियमितताओं और नियुक्तियों में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है। जिलाधिकारी (DM) की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट अब उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड को भेज दी गई है, जिसके बाद पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।

वित्तीय रिकॉर्ड गायब

जांच के दौरान सबसे बड़ा सवाल पिछले कई वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर उठा। समिति के अनुसार, दरगाह प्रबंधन पिछले लगभग 10 वर्षों के आय-व्यय से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके अलावा कुछ नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं। इन शुरुआती निष्कर्षों के बाद चढ़ावे और अन्य वित्तीय लेनदेन में अनियमितता की आशंका और गहरा गई है।

दरगाह पर गंभीर आरोप

मामले को और गंभीर बनाते हुए दरगाह के पूर्व खादिम मोहम्मद मसूद अली मसूदी ने आरोप लगाया कि पिछले करीब 20 वर्षों से दरगाह का नियमित ऑडिट नहीं कराया गया। उनका दावा है कि चढ़ावे और अन्य आय के प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं रही और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बहराइच की यह दरगाह देश की प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिनी जाती है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और परंपरागत मेले के दौरान चढ़ावे के साथ दुकानों के आवंटन से भी बड़ी आय होती है। पिछले दो वर्षों से सरकारी स्तर पर मेले पर प्रतिबंध रहा, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु दरगाह पहुंचते रहे।

वक्फ बोर्ड को रिपोर्ट

जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति की रिपोर्ट में वित्तीय दस्तावेजों की कमी और कुछ प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए वक्फ बोर्ड को भेज दिया गया है। हालांकि, दरगाह प्रबंधन समिति ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। समिति के सदस्य एवं अधिवक्ता दिलशाद अहमद का कहना है कि दरगाह में मिलने वाले चढ़ावे की गणना प्रशासन की निगरानी में होती है और उसका पूरा रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड को भेजा जाता है। उन्होंने गबन और वित्तीय अनियमितता के सभी आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई वक्फ बोर्ड की जांच और निर्णय पर निर्भर करेगी।

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